बिरसा मुंडा आंदोलन मुंडा जनजाति द्वारा चलाया गया एक बहुत ही तीव्र आंदोलन था जो 1899 से 1900 में शुरू हुआ जिसका नेतृत्व बिरसा मुंडा द्वारा किया गया इसीलिए इस आंदोलन का नाम बिरसा मुंडा पड़ा बिरसा के 1899 में क्रिसमस की पूर्व संध्या पर मुंडा जनजाति का शासन स्थापित करने के लिए विद्रोह का ऐलान किया और उसने ठेकेदार जमींदार राजाओं हकीमो और ईसाइयों के कत्ल करने का आवाहन किया उसने घोषणा की कि दीप से अब हमारी लड़ाई होगी और उनके खून से जमीन इस तरह लाल होगी जैसे लाल झंडा जमींदारों अधिकारियों व्यापारियों की हत्या की गई उनके परिवार के बच्चों महिलाओं को भी निशाना बनाया गया

बिरसा आंदोलन का स्वरूप

मुंडा आंदोलन एक जनजाति आंदोलन था इसीलिए या आंदोलन एक धार्मिक आंदोलन होने के कारण हिंसात्मक स्वरूप ले लिया क्योंकि बिरसा मुंडा आंदोलन जनजातियों को उनकी संस्कृति रीति रिवाज को नष्ट करते थे अंग्रेज द्वारा जिसके कारण मुंडा आंदोलन एक हिंसात्मक स्वरूप ले लिया मुंडा जनजाति ने अपने आप को भगवान का दूध कहां और भगवान से प्राप्त गजब शक्ति की चर्चा भी की इस आंदोलन में बिरसा मुंडा ने अपने आंदोलन की धार्मिक भावनाओं से जोड़ दिया हजार आदिवासी उसे देखने सुनने आने लगे और उसके अनुयाई बन गए बिरसा ने महाप्रलय एवं 9yug की भविष्यवाणी की ईसाई धर्म अपना चुके आदिवासी अपने मूल धर्म में वापस लौटने लगे धार्मिक नेतृत्व के कारण उनका विश्वास और साहस और बढ़ा

बिरसा मुंडा आंदोलन का प्रभाव

बिरसा आंदोलन ज्यादा दिनों तक लाना संभव नहीं था इसलिए बिरसा आंदोलन को कुचल दिया गया और फरवरी उन्नीस सौ में बिरसा मुंडा को गिरफ्तार कर लिया गया बिरसा मुंडा को गिरफ्तार होने के बाद उनकी मृत्यु जेल में ही हो गई उसके बाद धीरे-धीरे या आंदोलन शिथिल पड़ गया उन्नीस सौ आठ में छोटा नागपुर रैयतवारी कानून पास हो गया भूमि संबंधी अधिकार लोगों को मिल गया बंधुआ मजदूरी पर प्रतिबंध लगा दिया गया बिरसा जनजातियों को अन्य सुविधाएं भी प्राप्त की गई!

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