1942 के भारत छोड़ो आंदोलन की भूमिका तैयार करने में उत्पन्न परिस्थिति का वर्णन करते हुए बिहार की महत्वपूर्ण भागीदारी

अलग-अलग प्रांतों में 28 महीने की सरकार चलाने के बाद कांग्रेस ने 1939 में इस्तीफा दे दिया तथा 1940 में महात्मा गांधी के नेतृत्व में व्यक्तिगत सत्याग्रह के माध्यम से अपनी मांगों को पूरा करवाने की कोशिश की गई लेकिन व्यक्तिगत सत्याग्रह असफल रहा द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान भारतीयों का विश्वास हासिल करने के उद्देश्य से 22 मार्च 1942 को क्रिप्स के नेतृत्व में एक 3 सदस्य कमेटी बनाई गई जिसके सदस्य सर क्रीप्स पैथिक लोरेंस एवं एलेग्जेंडर को बनाया गया जो भारत आया जिसे क्रिप्स मिशन के नाम से जाना जाता है

क्रिप्स ने भारतीय नेताओं को आश्वासन दिया कि युद्ध समाप्ति के बाद भारत को अपनी बेसिक राज्य का दर्जा दे दिया जाएगा लेकिन महात्मा गांधी ने इसे पोस्ट डेटेड चेक कहते हुए अस्वीकार कर दिया इस प्रकार क्रीप्स मिशन की असफलता तथा द्वितीय विश्व युद्ध में जापान की लगातार सफलता ने भारतीय जनता को एक बड़ा आंदोलन करने की प्रेरणा दी 8 अगस्त 1942 को मुंबई के ग्वालियर टैंक मैदान में अखिल भारतीय कांग्रेस के अधिवेशन में गांधी जी के नेतृत्व में भारत छोड़ो आंदोलन पारित किया गया भारत छोड़ो आंदोलन का प्रस्ताव जवाहरलाल नेहरू द्वारा रखा गया यह सरदार पटेल द्वारा इनका समर्थन किया गया

भारत छोड़ो आंदोलन में बिहार की भूमिका

भारत छोड़ो आंदोलन में बिहार की महत्वपूर्ण योगदान रहा है इस आंदोलन से सबसे ज्यादा प्रभावित क्षेत्र बिहार एवं पूर्वी उत्तर प्रदेश रहा 8 अगस्त को भारत छोड़ो आंदोलन का प्रस्ताव पारित होने के कुछ घंटों बाद ही महात्मा गांधी एवं अन्य नेताओं को गिरफ्तार करके जेल में डाल दिया गया इसकी प्रतिक्रिया स्वरूप शीघ्र ही पूरे देश में आंदोलन तीव्र हो गया पटना में 9 अगस्त को डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद को भारत रक्षा अभियान के तहत गिरफ्तार करके बांकीपुर सेंट्रल जेल में भेज दिया गया राज्य में सामूहिक जुर्माना अध्यादेश लागू कर दिया गया तब पटना स्थित महिला चरखा समिति की महिलाओं ने राजेंद्र प्रसाद की बहन भागवती देवी की अध्यक्षता में एक सभा आयोजन किया इस दिन गांधी मैदान में एक सभा आयोजित कर सचिवालय भवन पर झंडा फहराने का निर्णय लिया गया

11 अगस्त 1942 को पटना के छात्रों के एक जुलूस ने सचिवालय भवन पर झंडा फहराने गए पटना सचिवालय गोलीकांड में अपने प्राणों की आहुति देने वाले बहुत से छात्र से जिनका नाम उमाकांत सिन्हा सतीश प्रसाद झा रामानंद सिंह राजेंद्र सिंह जगपति कुमार सिंह देवी पता चौधरी तथा राम गोविंद सिंह है!

अंग्रेजों द्वारा की गई कायरता पूर्वक करवाई सेब पूरे बिहार में आंदोलन बहुत ही तेज हो गया 12 प्रस्ताव पारित कर सरकारी परिजनो को पूर्ण रूप से ठप करने का आवाहन किया गया अनेक स्थानों पर लोग हिंसक हो उठे तथा अंग्रेज अधिकारियों को मार भगाया इस आंदोलन में सिवान जिला के महाराजगंज थाना पर झंडा फहराने के क्रम में पुलेला प्रसाद श्रीवास्तव को गोली लगने से मृत्यु हो गई फुलेना प्रसाद की पत्नी तारा रानी ने थाना भवन पर झंडा फहराने कर अपनी गिरफ्तारी दे सीतामढ़ी से जुब्बा साहनी के नेतृत्व में आंदोलनकारियों ने 15 अगस्त 1942 को मीनापुर थाने के थानेदार बॉलर को जिंदा जला दिया

समाचार पत्र का प्रकाशन और आन्दोलन में भुमिका

13 अगस्त को मुंगेर में आजाद हिंदुस्तान नामक एक समाचार पत्र प्रकाशित किया गया जिसमें सरकारी दमन का विरोध किया गया इसके जवाब में सरकार की तरफ से भी 26 अगस्त 1942 को मुंगेर न्यूज़ का प्रकाशन सरकार की उपलब्धि को प्रचारित करने के लिए किया गया

भारत छोड़ो आंदोलन में बिहार के समाजवादी युवा नेता जयप्रकाश नारायण राम मनोहर लोहिया अरूणा आसफ अली गंगा शरण मिश्र तथा अन्य लोगों की महत्वपूर्ण भूमिका रही 1942 में ही जयप्रकाश नारायण को गिरफ्तार करके हजारीबाग जेल में डाल दिया गया 8 नवंबर 1942 को जयप्रकाश नारायण ने अपने साथियों के साथ भागकर नेपाल में शरण ली यहीं पर उन्होंने आजाद दस्ते का निर्माण किया तथा भूमिगत होकर आंदोलन का नेतृत्व किया राम मनोहर लोहिया अरूणा आसफ अली तथा अन्य भूमिगत होकर गुप्त रूप से जियो क संचालन किया भारत छोड़ो आंदोलन के प्रमुख नेताओं को गिरफ्तार हो जाने के कारण

यह आंदोलन समाजवादी के नेतृत्व में आ गया राम मनोहर लोहिया अरूणा आसफ अली तथा अन्य ने भूमिगत होकर गुप्त रूप से रेडियो का संचालन किया भारत छोड़ो आंदोलन के प्रमुख नेताओं को गिरफ्तार हो जाने के कारण या आंदोलन समाजवादियों के नेतृत्व में आ गया था जिससे इस आंदोलन में कृषक व मजदूरों की भागीदारी भी बढ़ गई थी

भारत छोड़ो आंदोलन में बिहार के सियाराम दल की महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी इस दल का गठन भागलपुर जिले के निवासी सियाराम सिंह द्वारा किया गया था यह दल एक गुप्त सशस्त्र संगठन था जो नौजवानों को अस्त्र शस्त्र चलाना तथा छापामार युद्ध की रणनीति का प्रशिक्षण देता था इसका उद्देश्य गांव की जनता को संगठित कर ग्राम स्वराज की स्थापना करना या आंदोलन लगभग 2 वर्षों तक चला

भारत छोड़ो आंदोलन का निष्कर्ष

इस प्रकार भारत छोड़ो आंदोलन सरकारी नीतियों के खिलाफ भारतीय जनता का एक जन आक्रोश था इस आंदोलन में बिहार की जनता ने महत्वपूर्ण भागीदारी निभाई इस आंदोलन का प्रसाद पूरे बिहार में हुआ था इस आंदोलन में बिहार की भूमिका का वर्णन इसी बात से लगाया जा सकता है कि बिहार के आंदोलनकारियों को अधिकतम 51 वर्ष की सजा तथा पूरे राज्य पर सामूहिक रूप से 4000000 रुपए का जुर्माना वसूला गया या आंदोलन स्वतंत्रता प्राप्ति का अंतिम आंदोलन था क्योंकि इसके बाद स्वतंत्रता प्राप्ति के लिए वार्ता का ही दौड़ रहा!

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